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पीपल्स पावर ऑफ़ नेशन - राष्ट्रीय लोकशक्ति

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धर्म बाँटता है, संस्कृति जोड़ती है

Religion belongs to some; culture belongs to all. Does that hold, in your experience?

धर्म कुछ लोगों का होता है; संस्कृति सबकी होती है। विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों और राष्ट्रों के लिए यही पीपीएन का संदेश है।

इस दृष्टि से भारत सदैव एक आदर्श रहा है। यहाँ अनादि काल से धर्म और संस्कृति की कोई सीमाएँ नहीं रहीं; वे सदियों से घुलमिलकर एकता की एक ही इकाई बन गए हैं।

उस आनंद की कल्पना कीजिए जो देवताओं और मनुष्यों, दोनों को हुआ होगा जब बिस्मिल्ला ख़ाँ ने वाराणसी के मंदिर में शहनाई बजाई, या कुमार गंधर्व ने दिल्ली के श्रीराम सभागार में कबीर के दोहे गाए। या बॉलीवुड को देखिए, जिसने हिंदी के लिए सभी सरकारों से अधिक किया और साथ ही उर्दू को भी बढ़ावा दिया।

हम आपसे क्या पूछना चाहते हैं

आप जहाँ रहते हैं, वहाँ आपके अपने अनुभव में क्या यह सच है? आपने कहाँ देखा कि संस्कृति ने वह कर दिखाया जो राजनीति न कर सकी? और यदि पीपीएन राष्ट्रीय संस्कृति संस्थान बनाए, तो उसे वास्तव में क्या करना चाहिए?

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