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पीपल्स पावर ऑफ़ नेशन - राष्ट्रीय लोकशक्ति

परियोजनाएँ

गाँव गोद लेना

भारत मुख्यतः गाँवों का देश है, जहाँ उसकी सत्तर प्रतिशत से अधिक जनसंख्या रहती है। भारत का स्वास्थ्य और समृद्धि मुख्यतः गाँवों पर निर्भर है।

भारत मुख्यतः गाँवों का देश है, जहाँ उसकी सत्तर प्रतिशत से अधिक जनसंख्या रहती है। भारत का स्वास्थ्य और समृद्धि मुख्यतः गाँवों पर निर्भर है। उन्हीं की क्रय शक्ति देश भर के उद्योग और व्यापार को सहारा देती है। किंतु दुर्भाग्य से विकास की बात आने पर गाँव प्रायः उपेक्षित रह जाते हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों मीडिया की गाँवों में रुचि कम ही रहती है, सिवाय किसी आपदा या संकट के समय। किंतु केंद्र में नई सरकार के साथ स्थिति बदलती प्रतीत होती है। नई शुरू की गई सांसद आदर्श ग्राम योजना है, और उससे पहले की सरकार की "प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना" भी है, जिसमें दलित बहुल गाँवों के विकास को प्राथमिकता दी जानी थी। नई योजना का लक्ष्य सभी गाँवों को समेटना है।

यह कार्य वास्तव में कठिन है, यह देखते हुए कि भारत में 2,50,000 पंचायतों में फैले 6,38,000 गाँव हैं। किंतु आरंभ कहीं न कहीं से करना ही होगा। वर्तमान में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के लिए आवंटित राशि प्रतिवर्ष 4,000 करोड़ रुपये से अधिक है। लोकसभा और राज्यसभा में क्रमशः 543 और 250 सदस्य हैं। प्रत्येक लोकसभा सांसद को अपने क्षेत्र के विकास पर व्यय करने के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि राज्यसभा सांसद एमपीलैड योजना के अंतर्गत मिली राशि देश के किसी भी भाग में व्यय कर सकते हैं। इस प्रकार लोकसभा के पाँच वर्ष के कार्यकाल में उसके सदस्य 13,575 करोड़ रुपये की विशाल राशि व्यय करते हैं, जबकि राज्यसभा सांसद 7,500 करोड़ रुपये। वर्तमान सरकार की योजना है कि 2019 में अपने कार्यकाल के अंत तक लगभग 2,500 गाँवों का पूर्ण विकास सुनिश्चित किया जाए।

आज की स्थिति दयनीय है। अब तक या तो राशि अव्ययित रह गई है या विकास मुश्किल से दिखाई देता है, यद्यपि राशि का दुरुपयोग नहीं हुआ। किंतु वर्तमान सरकार गाँवों में दृश्य परिवर्तन देखना चाहती है। नई योजना के अंतर्गत प्रत्येक गाँव में बेघरों के लिए पक्के (कम लागत) मकान, समुचित स्वच्छता सुविधाएँ, पेयजल, मुख्य सड़क से संपर्क और बिजली आपूर्ति होगी। ध्यान लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, तथा कक्षा दस तक सभी बच्चों के लिए डिजिटल माध्यम से नि:शुल्क शिक्षा पर भी है। योजना का लक्ष्य सभी को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी है।

इससे सांसदों पर दबाव बढ़ता है और उन्हें विकास योजनाएँ तैयार करने के लिए सहायकों की आवश्यकता होगी। चूँकि विद्यमान सरकारी एजेंसियों की विश्वसनीयता कम है, पीपीएन जैसी संस्थाओं के पास सांसदों तक पहुँचकर अपनी सेवाएँ देने का अच्छा अवसर है, क्योंकि योजना में उल्लिखित सभी क्षेत्र पीपीएन के दृष्टि पत्र और ध्येय पत्र की विशेषताएँ भी हैं। महाराष्ट्र में गाँव गोद लेने की कुछ योजनाएँ पहले से चल रही हैं, जिनसे पीपीएन पहले से जुड़ा हुआ है। पीपीएन महाराष्ट्र के भाजपा और शिवसेना सांसदों से सहायक के रूप में ठोस प्रस्तावों के साथ संपर्क करने का प्रस्ताव रखता है, और अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से उनकी गाँव गोद लेने की योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग देगा।

भारत में गाँव
638,000भारत में गाँव
पंचायतें
250,000पंचायतें
भारतीय गाँवों में रहते हैं
70%+भारतीय गाँवों में रहते हैं
एमपीलैड्स वार्षिक निधि
₹4,000 crएमपीलैड्स वार्षिक निधि
गाँव गोद लेना - PPN in the field
गाँव गोद लेना - PPN in the field

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